रंगभरी एकादशी…..!!!!!
रंगभरी एकादशी। होली पर्व का आगमन, प्रारम्भ और हर्षोल्लास के साथ मन के अंतराल को विभिन्न रंगों से सराबोर करने का पवित्र अवसर। भगवान शंकर के डमरू के थापों पर थिरकते भाव भक्ति से आल्हादित हृदय में आध्यात्मिक तरंगों का अद्भुत समावेश। मन में एक विचार आ रहा है। क्यों न आज अभी से ही सबके साथ आध्यात्मिक होली खेलना प्रारम्भ कर दूं।
रंगों का खेल तो लंबे अवधि से चल रहा है। लेकिन ये रंग इतना कच्चा होता है की कुछ दिन तक भी नहीं टिक पाता। कुछ ही दिनों में हम भूल जाते हैं कि हमने कोई होली खेली थी। फिर वही पुराना जीवन और उसकी थकान भरी दिनचर्या। माया का अदृश्य रंग चढ़ा रहता है जो हमारी साँसों को बदरंग करता रहता है।
एक विचार है कि आपको इस होली में आध्यात्म का कुछ ऐसा रंग चढ़ा दूं जो आजीवन आपके साथ होली खेलता रहे। दोनों होली का आनंद मिलता रहे।
जीवन में कुछ ऐसी उलझनें होती हैं जिनका हल नहीं मिल पाता है। कारण भी नहीं समझ आता। यदि उन उलझनों से निकलने का मार्ग मिल जाय तो जीवन का रंग ही बदल जाए और अंतराल में निरंतर रंगों की बौछार होती रहे। इसलिए आज के इन पवित्र क्षणों में कुछ उपहार देना चाहता हूं।
आपने पातंजलि के योग सूत्रों तथा भगवद्गीता के श्लोकों का अवश्य अध्ययन किया होगा और उनके अनुदेशों से संभवतः पूर्णतया तृप्त भी होंगे।
मैं इन सद्ग्रन्थों की आपको एक ऐसी व्याख्या से सराबोर करने के लिए उपहार स्वरूप भेंट करने का आग्रह कर रहा हूं जिनके शब्द क्रियात्मक तपश्चर्या के उन अनिवर्चनीय उपलब्धियों के तरफ विचारणीय होने को विवश कर देते हैं, जिन्हें उपलब्ध शब्दकोषों के शब्दों से वचनिय बनाना अत्यंत दुरुह कार्य है। आप अवश्य विभिन्न व्याख्यायों से तृप्त होंगे, किंतु इन व्याखायों संग होली खेल कर आप जन्म जन्मांतरों तक के लिए पूर्णतया संतृप्त हो जाएंगे और इसका रंग इतना पक्का होगा कि किसी जन्म में नहीं उतरेगा।
चलते रहना है। रंग बरसाते रहना है। ऐसी होली में सब कुछ रंग जाने के बाद भी सब कुछ रंग जाना शेष ही रह जाता है।
इन विभिन्न अविनाशी रंगों का प्रयोग करते रहिएगा और मस्ती वाली होली खेलते रहिएगा।
आडियो लिंक्स / Audio Links.

आध्यात्मिक मस्ती वाली होली में विनम्र शुभेक्षाओं सहित,
~मृत्युञ्जयानन्द।

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