Category Archives: Revered Goswami Tulsidas

बार बार रघुबीर सँम्हारी! (Unceasingly Remembering Lord Ram!)

“बार बार रघुबीर सँम्हारी।” ***** Unceasingly Remembering Lord Ram!   पुण्यमयी रामनवमी पर महापुरुषों का विशेष संदेश! (रामचरित मानस) **************** Important message from great saints on the auspicious occasion of Ram Navami! (Ramcharitmanas)   यह ‘मानस’ है। मानस कहते हैं- … Continue reading →

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राम, एक अनुभवगम्य आध्यात्मिक विश्लेषण (Ram, A Perceptible Spiritual Analysis)

राम, एक अनुभवगम्य आध्यात्मिक विश्लेषण। ************************************ Ram, a Perceptible Spiritual Interpretation.   जो आनंद के समुद्र हैं, सुख की राशि हैं, अपनी एक बूंद से त्रैलोक्य को सुपास प्रदान करने वाले हैं, वे राम हैं।अलौकिक अनुभूतियों के द्वारा, अंग स्पंदन … Continue reading →

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सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद! (That unborn, Eternal One Has, Out of Love and Devotion, Taken the Lap of Kausalya!)

सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद…..!!!!! ***************************************** That unborn, Eternal One Has, Out of Love and Devotion, Taken the Lap of Kausalya!   “रचि महेश निज मानस राखा।” शंकरजी ने इसे अपने मन के अन्तराल में रखा था … Continue reading →

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Bow Down in Your Lotus Feet O’Lord Ram!

Bow Down in your Lotus Feet O’Lord Ram! *****   श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं । नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं । पटपीत मानहुँ तडित … Continue reading →

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राम राम राम जीह जौलौं तू न जपिहै (Until you Chant the Name of Lord Ram with your Tongue)

राम राम राम जीह जौलौं तू न जपिहै । तौलौं, तू कहूँ जाय, तिहूँ ताप तपिहैं ॥१॥   सुरसरि – तीर बिनु नीर दुख पाइहै । सुरतरु तरे तोहि दारिद सताइहै ॥२॥   जागत, बागत, सपने न सुख सोइहै । … Continue reading →

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जे राखे रघुबीर, ते उबरे तेहिं काल महु (Those Protected by Raghubir (Lord Ram) are Saved, even in the Direst of Times)

रामनवमी के पुण्य अवसर पर पूज्य गुरुदेव द्वारा अमूल्य आध्यात्मिक रहस्योद्घाटन। जे राखे रघुबीर, ते उबरे तेहिं काल महु! ****************************************   इहां देव ऋषि गरुड़ पठायो । राम समीप सपदि सो आयो ।। दो :- खगपति सब धरि खाए, माया … Continue reading →

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