बाहर जगजग उजियारा,
अंतस में घनेरा अंधियारा।
सनेह के तेल में, नेह के बाती से,
माटी की काया में,
अरे कोई तो दियना जलाओ रे।
मंगलमय दीपावली की शुभकामनाएं।
सविनय,
_/l\_
-मृत्युञ्जयानन्द- ©2018
बाहर जगजग उजियारा,
अंतस में घनेरा अंधियारा।
सनेह के तेल में, नेह के बाती से,
माटी की काया में,
अरे कोई तो दियना जलाओ रे।
मंगलमय दीपावली की शुभकामनाएं।
सविनय,
_/l\_
-मृत्युञ्जयानन्द- ©2018