जननी मैं न जीऊँ बिन राम……!!!!!

जननी मैं न जीऊँ बिन राम।
जननी मैं न जीऊँ बिन राम,
राम लखन सिया वन को सिधाये गमन,
पिता राउ गये सुर धाम,
जननी मैं न जीऊँ बिन राम।
कुटिल कुबुद्धि कैकेय नंदिनि,
बसिये न वाके ग्राम,
जननी मैं न जीऊँ बिन राम,
प्रात भये हम ही वन जैहैं,
अवध नहीं कछु काम,
जननी मैं न जीऊँ बिन राम,
तुलसी भरत प्रेम की महिमा,
रटत निरंतर नाम,
जननी मैं न जीऊँ बिन राम।
विनम्र शुभेक्षाओं सहित,
~मृत्युञ्जयानन्द।
                                                                           🙇‍♂️🙇‍♂️🙇‍♂️🙇‍♂️🙇‍♂️
May be an image of text that says 'जननी, मैं न जियूँ बिन राम होत भोर हमहू वन जइबे अवध आवै केहि काम| කයනනන'
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